गोपाष्टमी स्पेशल- श्री पाद बाबा गौशाला में गायों का पूजन हषोल्लास के साथ मनाया गया

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वृन्दावन (विकास अग्रवाल)- गोपाष्टमी के मौके पर वृन्दावन की श्री पाद बाबा गौशाला में गायों का पूजन हषोल्लास के साथ किया गया । गौशाला में बाबा दामोदर दास के सानिध्य में  भक्तों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य गायों का पूजन किया और गायों को गुड़ और चारा खिलाया। इस दौरान सैकड़ों गौ भक्तों ने गौ माता की पूजा अर्चना पुण्य लाभ लिया।

कहते हैं कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के छ्ठे वर्ष में कदम रखा। तब वे अपनी  यशोदा माँ से ज़िद्द करने लगे कि वो अब बड़े हो गये हैं। वे अब बछड़े चराने की बजाए गायें चराना चाहते हैं। उनकी हठ के आगे माँ को हार माननी पड़ी और इसकी आज्ञा लेने के लिये उन्हें नंदबाबा के पास भेज दिया।

श्रीकृष्ण ने नन्दबाबा के आगे जिद्द रख दी कि वे अब गाय ही चरायेंगे। नन्दबाबा ने विप्रों से गाय चराने के लिये मुहूर्त निकालने के लिये कह दिया। पंचांग देखने के बाद विप्र अचरज में बोले कि इसके अलावा कोई और मुहूर्त आगामी एक वर्ष तक नहीं है। वह दिन गोपाष्टमी का था। उस दिन श्रीकृष्ण ने गौ पालन शुरू किया। मां यशोदा ने कान्हा को बहुत सुंदर तैयार किया। कान्हा के सिर पर मोर मुकुट सजाया और पैरों में घुंघुरू बांधे और सुंदर सी पादुका पहनने को दी लेकिन कान्हा ने पादुका पहनने से इनकार कर दिया। कहा कि अगर तुम इन सब गायों के पैरों में पादुका बंधोगि तभी मैं ये पहनूंगा। ये सुनकर माँ यशोदा भावुक हो जाती हैं। कान्हा नंगे पैर ही गौ चारण को निकल जाते हैं। यहीं से कान्हा का नाम गोपाल पड़ा।

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